राजस्थान की Best झील का पर्यटन

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Rajasthan ki jhile

झील

भारत का राजस्थान राज्य प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ की झीलें उनमें से एक हैं, जो प्रकृति की अनुपम सुंदरता को प्रस्तुत करती हैं। राजस्थान की झीलों में पानी की चमक, उसकी स्वच्छता और विविधता की सुंदरता होती है।

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झीलें राजस्थान की प्रमुख पर्यटन आकर्षणों में से एक हैं, जो शांति और सांस्कृतिक अनुभव का एक सामर्थ्यपूर्ण स्थल हैं। राजस्थान की झीलों में अपने साथी और परिवार के साथ शांति और सुकून का अनुभव करें, जो आपके जीवन को यादगार बना देगा। यहाँ की प्राकृतिक सौंदर्य और ऐतिहासिक विरासत आपको मनोरंजन के साथ-साथ आध्यात्मिकता का अनुभव भी कराएगा।

राजस्थान की झीलों को दो भागों में बाँटा जा सकता है-मीठे पानी की झीलें एवं खारे (लवणीय) पानी की झीलें।

राजस्थान में स्थित खारे पानी की झीलों को ‘टेथिस सागर’ का अवशेष माना जाता है ।

खारे पानी की (लवणीय) झीलें

राजस्थान की खारे पानी की झीलों की उत्पत्ति एवं नमक के स्त्रोत के बारे में विभिन्न विद्वानों के विचार-

  1. हूम्स – विशाल जलाशय द्वारा (आंतरिक जल प्रवाह की नदियों द्वारा परिपूरित)।
  2. नोटिलिग – लवणीय जल के स्रोतों द्वारा(लवणीय चट्टानें)।
  3. हॉलेण्ड एवं क्राइस्ट – ग्रीष्म ऋतु में चलने वाली द.प. मानसूनी पवनों द्वारा कच्छ की खाडी से अपने साथ सोडीयम क्लोराइड के कण लाकर राजस्थान में छोडे जाते हैं।

सांभर झील (जयपुर-नागौर)

  1. सांभर झील 27° से 29° उिरी अकक्षाशो एवं 74° से 75° पूर्वी देशान्तरों के मध्य जयपुर एवं नागौर जिलों में स्थित है। अधिक वर्षा होने पर इसका विस्तार अजमेर जिले में भी हो जाता है।
  2. भारत में खारे पानी की सबसे बडी झील ‘सांभर‘ की समुद्रतल से औसत ऊँचाई 367 मी. है।
  3. इस झील में मन्था (मेढा), रूपनगढ, खारी, खण्डेला इत्यादि नदियों सहित विभिन्न नाले जल लाते हैं जिनका अपवाह (जलग्रहण) क्षेत्र 500 वर्ग किमी. से भी ज्यादा है।
  4. सांभर झील की अधितम लम्बाई 32 किमी. तथा चौडाई 3 से 12 किमी. है।
  5. झील का अधिकतम क्षेत्रफल वर्षा ऋतु में 145 वर्ग किमी. तक हो जाता है।
  6. झील में 4 मीटर की गहराई तक नमक की अनुमानित मात्रा 350 लाख टन है।
  7. भारत सरकार की ‘हिन्दुस्तान नमक कम्पनी’ (1958 में स्थापित) द्वारा 1964 में ‘सांभर साल्ट पररयोजना’ प्रारम्भ की गई, जो यहाँ पर नमक का उत्पादन करती है।
  8. यहाँ पर सोडीयम सल्फेट बनाने का एक कारखाना भी है।
  9. देश के कुल नमक का लगभग 8% सांभर झील से प्राप्त किया जाता है।

डीडवाना झील (नागौर)

  1. 27° उतरी अक्षाश एवं 74° पूर्वी देशान्तर पर स्थित डीडवाना झील की लम्बाई लगभग 4 किमी. चौडाई 3 से 6 किमी. है, यहाँ पर वर्ष भर नमक तैयार किया जाता है।
  2. यहाँ पर राजस्थान सरकार द्वारा सोडीयम सल्फेट बनाने का सबसे बडा संयंत्र स्थापित किया गया है।
  3. क्लोराइड की जगह सल्फेट की मात्रा अधिक होने से यहाँ का नमक प्रायः खाने में अयोग्य है। इसका उपयोग चमडा व रंगाई- छपाई उद्योग में किया जाता है(औद्योधगक नमक)

पचपदरा झील (बाडमेर)

  1. यह झील बाडमेर जिले के बालोतरा से 25 किमी. उतर-पश्चिम में स्थित है।
  2. यह झील वर्षा पर निर्भर नहीं है, बल्कि नित्यवाही जल स्रोतों से पर्याप्त खारा जल मिल जाता है।
  3. यहाँ के नमक में सोडीयम क्लोराइड (Nacl) की मात्रा 98% तक होने के कारण, यह खाने की दृष्टि से स्रवोतम होता है। यहाँ पर राजस्थान सरकार का राजकीय लवण स्त्रोत (राजकीय उपक्रम विभाग) स्थित है।
  4. यहाँ पर नमक का उत्पादन परम्परागत रूप से खारवाल जाति के लोगों के द्वारा ‘मोरली’ नामक झाडी की टहनी की सहायता से किया जाता है।
  5. यहाँ का नमक उतम किस्म का खाद्य नमक होता है।

लूणकरणसर झील (बीकानेर)

  1. यह झील उतरी राजस्थान में बीकानेर जिले में बीकानेर-श्रीगंगानगर मार्ग पर लूणकरणसर कस्बे के निकट स्थित है।
  2. यह उतरी राजस्थान की एकमात्र खारे पानी की झील है।
  3. खारापन कम होने की वजह से स्थानीय माँग की पूर्ति का ही नमक उत्पादित होता है।

राजस्थान में खारे पानी की अन्य प्रमुख झीलें

(i) कावोद/काणोद एवं पोकरण (जैसलमेर)।
(ii) डेगाना एवं कुचामन (नागौर)।
(iii) कोछोर एवं रैवासा (सीकर)।
(iv) फलौदी (जोिपुर)।

सांभर,डीडवाना, पचपदरा में छोटी-छोटी नमक उत्पादक धनजी संस्थाएँ हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘देवल’ कहते हैं।

राजस्थान में नमक की सबसे बडी मण्डी नावां (नागौर) है।

मीठे पानी की झीलें

मीठे पानी की झीलें वे अनोखी स्वरूपवाली झीलें हैं जो आपको उनकी मीठाई और सुंदरता से मोहित कर देती हैं। ये झीलें पानी की ताजगी और स्वच्छता के साथ-साथ अपनी विशेष प्राकृतिक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्वपूर्णता के लिए भी प्रसिद्ध हैं।

जयसमन्द झील (उदयपुर)

राजस्थान की झील
  1. उदयपुर से 51 किमी. द. पू. में स्थित इस झील का गोमती नदी पर बांद बनाकर करवाया गया था।
  2. जयसमन्द विश्व की मीठे पानी की दूसरी सबसे बडी कृत्रित्म झील है।
  3. स्थानीय लोग इसे ‘ढेबर झील’ के नाम से जानते हैं।
  4. यह झील 15 किलोमीटर लम्बी तथा 8 किलोमीटर चौडी है।
  5. वर्षाकाल में इस झील का कुल कुल क्षेत्रफल लगभग 500 वर्ग किमी. हो जाता है।
  6. झील में कुल सात टापू हैं, जहाँ भील एवं मीणा जनजाति के लोग धनवास करते हैं।
  7. इनमें सबसे बडे टापू का नाम ‘बाबा का भागडा’ एवं दूसरे सबसे बडे टापू का नाम ‘प्यारी’ है।
  8. ‘बाबा का भागडा’ टापू पर ‘आइलैण्ड रिसोर्ट’ नामक होटल स्थित है।
  9. 1950 ई. में जयसमन्द झील से श्यामपुरा एवं भाट गाँवों में नहरें निकाली गईं।
  10. जयसमन्द के निकट एक पहाडी पर ‘चित्रित्त हवामहल’ एवं ‘रूठी रानी का महल’ स्थित है, जहाँ पर उदयपुर रियासत की शीतकालीन राजधानी होती थी।

राजसमन्द / राजसमुद्र झील (राजसमन्द)

  1. यह राज्य की एकमात्र ऐसी झील है जिस पर किसी जिले का नामकरण हुआ है।
  2. राजसमन्द झील का निर्माण उदयपुर के महाराणा राजसिंह द्वारा 1662 ई. में छोटी गोमती नदी पर बांध बनवाकर किया गया।
  3. यह झील राजसमन्द जिले में काँकरोली रेलवे स्टेशन के धनकट स्थित है।
  4. झील काउतरी भाग ‘नौ चौकी’ कहलाता है जहाँ पर सफेद संगमरमर के 25 विशाल शिलालेखों पर लिखी गई ‘राजप्रशस्ति’ में मेवाड साम्राज्य की स्थापना से लेकर राजसिंह तक का इतिहास संस्कृत भाषा में लिखा गया है। ‘राजप्रशस्ति महाकाव्य’ की रचना महाराणा राजसिंह के दरबारी कवि ‘रणछोड भट्ट’ ने की थी।
  5. राजसमन्द झील के किनारे ‘घेवर (गेवरी) माता का मंदिर’ एवं दयालशाह का किला स्थित है।

पिछोला झील (उदयपुर)

  1. चौदहवीं शताब्दी में राणा लाखा (मेवाड) के शासनकाल में एक बंजारे द्वारा पिछोली गाँव के धनकट इसका निर्माण करवाया गया था। महाराणा उदयसिंह ने इसकी मरम्मत करवाई।
  2. वर्तमान में यह मनोरम झील उदयपुर नगर के पश्चिम में लगभग 7 किमी. की लम्बाई में फैली है। सीसारमा व बुझडा नदियाँ इस झील को जलापूर्ति करती हैं।
  3. झील में स्थित दो टापुओ पर ‘जगनिवास’ एवं ‘जगमंदिर’ महल बने हुए हैं। यहाँ लेक पैलेस होटल है।
  4. महाराणा कर्णसिंह के समय जगमंदिर महल में शहजादा खुर्रम (शाहजहाँ) ने अपने पिता जहाँगीर से विद्रोह के समय शरण ली थी।
  5. जगमंदि र महल में ही 1857 ई. में राष्ट्रीय आन्दोलन के दौरान महाराणा स्वरूप सिंह ने नीमच की छावनी से भागकर आए 40 अंग्रेजों को शरण देकर क्रांतिकारियों से बचाया था।
  6. जगनिवास महल (लैक पैलेस) विश्व के सुंदरतम महलों में से एक माना जाता है। इस महल का निर्माण महाराणा जगतसिंह ने 1746 ई. में करवाया था।
  7. पिछोला झील के किनारे चामुण्डा माता का मंदिर स्थित है जहाँ देवी के पद-चिह्नों (पगल्या) की पूजा की जाती है। पिछोला के किनारे ‘उदयपुर का राजमहल’ (City Palace) बना हुआ है।

फतेहसागर झील (उदयपुर)

  1. उदयपुर नगर के उतर में स्थित यह झील एक नहर (स्वरूप सागर) द्वारा पिछोला झील से जुडी हुई है।
  2. फतेहसागर का निर्माण महाराणा जयसिंह ने 1687 ई. में करवाया था , बाद में महाराणा फतेह सिंह ने 1900 ई. में इसका जीणोद्धार करवाया।
  3. इसकी नींव का पत्थर ड्यूक ऑफ कनॉट द्वारा रखे जाने के कारण इसे ‘कनॉट बाँध भी कहते हैं।
  4. फतेहसागर झील के किनारे मोती मगरी में महाराणा प्रताप की अश्वारूढ धातु प्रतिमा (प्रताप स्मारक) लगी हुई है। निकट ही ‘सहेलियों की बाडी’ नामक सुंदर बगीचा स्थित है जिसका निर्माण महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय द्वारा पुननिर्माण मेवाड के महाराणा फतेहसिंह द्वारा करवाया गया था।
  5. फतेहसागर झील में एक टापू पर ‘नेहरू पार्क’ तथा दूसरे पर ‘सौर वेधशाला’ स्थित है।

पुष्कर झील (अजमेर)

राजस्थान की झील
  1. अजमेर से 11 किमी. की दूरी पर उतर-पश्चिम में अजमेर- नागौर मार्ग (राष्ट्रीय राजमार्ग -58) पर भारत में सबसे पवित्र मानी जाने वाली पुष्कर झील स्थित है।
  2. झील के किनारे कुल 52 घाट बने हुए हैं जिसमें सबसे बडा महात्मा गांधी घाट (गौघाट) है, ब्रह्मघाट एवं राह घाट भी महत्त्वपूर्ण हैं।
  3. इन घाटों का निर्माण 944 ई. में मण्डोर के शासक नाहरराव परिहार ने करवाया था।
  4. गौघाट का पुननिर्माण मराठा सरदारों ने 1809 ई. में करवाया। कहा जाता है कि गौघाट पर सिक्खों के दसवें गुरु गोविन्दसिंह ने 1705 ई. में गुरु ग्रन्थ साहिब का पाठ किया था ।
  5. वर्ष 1911 ई. में इंग्लैण्ड की महारानी मेरी की यात्रा की याद में पुष्कर के किनारे क्वीन मेरी जनाना घाट बनवाया गया।
  6. पद्म पुराण के अनुसार पुष्कर सरोवर का निर्माण प्रजापिता ब्रह्मा द्वारा करवाया गया था।
  7. झील के किनारे ब्रह्माजी का भारत में एकमात्र प्रसिद्मं मदिर स्थित है।
  8. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण एवं ब्रह्माजी की मूर्ति की स्थापना आदि शंकराचार्य ने करवाई थी
  9. बाद में वर्तमान मंदिर का निर्माण गोकुलचन्द पारीक ने 1809 विक्रमी में करवाया (1752 ई.)।
  10. झील के किनारे सावित्री मंदिर (रत्निगिरी पर्वत की चोटी पर), रंगनाथ जी (रमा बेकुण्ठ) का मंदिर (दक्षिण भारतीय शैली में), वराह मंदिर, आत्मेश्वर महादेव मंदिर एवं गायत्री मंदिर स्थित हैं।
  11. झील के निकट ही ‘बूढा (वृहद्) पुष्कर’ एवं ‘कनिष्ठ पुष्कर’ नामक तीर्थ स्थित हैं ।
  12. पुष्कर झील के किनारे आमेर के राजा मानसिंह प्रथम द्वारा निर्मित मान महल स्थित है, जहाँ वर्तमान में आर. टी.डी. सी. द्वारा ‘होटल सरोवर’ संचालित किया जा रहा है।
  13. पुष्कर में प्रति वर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक पाँच दिवसीय विशाल मेला भरता है, क्योंकि कार्तिक पूर्णिमा को पुष्कर सरोवर में स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्त्व है। इस दौरान यहाँ विशाल पशु मेला भी आयोजित होता है। कनाडा के सहयोग से इस झील को गहरा व स्वच्छ रखने की योजना चल रही है।

नक्की झील (सिरोही)

  1. राजस्थान में सर्वाधिक ऊँचाई (1300 मी.) पर स्थित नक्की झील सिरोही जिले में आबू पर्वत पर स्थित है।
  2. भूगोलवेताओ के अनुसार यह एक ‘ज्वालामुखी क्रेटर झील’ है।
  3. एक किंवदन्ती के अनुसार देवताओ ने अपने नाखूनों से इस झील को खोदा था। इसी कारण इसका नाम ‘नक्की झील’ पडा। झील के किनारे रघुनाथ जी का मंदिर, टॉड रॉक, नन रॉक, पैरेंट रॉक, राम झरोखा गुफा, हाथी गुफा एवं चम्पा गुफा स्थित हैं।
  4. यह झील गरासिया जनजाति के लिए तिरत स्थल माना जाता है।

आनासागर झील (अजमेर)

  1. अजमेर के निकट नागपहाड की तलहटी में पृथ्वीराज चौहान के पर्तामह आनाजी ने इस झील का निर्माण 1137 ई. में करवाया था
  2. इसके किनारे बारादरी का निर्माण शाहजहाँ ने 1637 ई. में करवाया तथा दौलतबाग, जो कि अब सुभाष उद्यान के नाम से जाना जाता है, का निर्माण मुगल बादशाह जहााँगीर ने करवाया।

फॉयसागर (अजमेर)

  1. अजमेर के निकट ही वर्ष 1891-92 में अकाल राहत कार्यों के दौरान एक अंग्रेज अभियन्ता श्री फॉय ने बांडी नदी पर बांध बनाकर फॉयसागर झील का निमार्ण करवाया, जो वर्तमान में एक खूबसूरत पिकनिक स्थल है।
  2. अधिक भरने पर इस झील का जल आनासागर झील में जाता है।

सिलीसेढ झील (अलवर)

  1. अलवर से 13 किमी. दूर चारों ओर से अरावली की पहाडियों से घिरी सिलीसेढ झील लगभग 10 वर्ग किमी. क्षेत्र में फैली है।
  2. इस झील के किनारे 1845 ई. में अलवर के महाराजा विनय सिंह ने अपनी रानी शीला के लिए एक शाही शिकारगाह (लॉज) एवं छह मंजिला सुंदर महल बनवाया।
  3. इस महल में अब ‘होटल लैक पैलेस’ (R.T.D.C.) संचालित किया जा रहा है।

कोलायत झील (बीकानेर)

  1. बीकानेर से 50 किमी. दक्षिण में बीकानेर-जैसलमेर मार्ग पर कोलायत कस्बे के निकट कपिल मुनि की तपोस्थली ‘कोलायत झील’ स्थित है।
  2. कपिल मुनि भारतीय दर्शन में सांख्य दर्शन के प्रणेता माने जाते हैं।
  3. यहाँ पर प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर मेले का आयोजन होता है। इस मेले में ‘दीपदान’ का विशेष महत्त्व है।

नवल सागर/नवलखा झील (बूंदी)

  1. बूँदी के दुर्ग (तारागढ) की पहाडी के तलहटी में राजा उम्मेदसिंह द्वारा इस झील का निर्माण करवाया गया।
  2. झील के मध्य में जल देवता ‘वरुण’ का मंदिर आधा डुबा हुआ है।
  3. इस झील के किनारे यहाँ के शासक विष्णु सिंह ने अपनी रानी सुंदरशोभा के लिए सुन्दर महल एवं सुन्दरघाट का निर्माण करवाया।

गैव सागर (डूंगरपुर) (गैब सागर /गैव सागर)

  1. इस झील का निर्माण महारावल गोपीनाथ ने करवाया था। इसके किनारे ‘उदय विलास महल’ एवं ‘राज राजेश्वर मंदिर’ स्थित हैं।
  2. झील के भीतर बादल महल एवं इसकी पाल पर डूगरपुर के महारावल पुंजराज द्वारा निर्मित गोवर्धन नाथ का
  3. मंदिर (श्रीनाथ मंदिर), निकट ही फतेहगढी, विवेकानन्द स्मारक, राजा बलि, वागड की मीराँ गवरी बाई, नाना भाई एवं काली बाई की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं।

बालसमन्द झील (जोधपुर)

  1. 1159 ई. में मण्डोर के शासक बालकराव प्रतिहार द्वारा निर्मित इस झील के किनारे ‘होटल लैक पैलेस’ स्थित है।

कायलाना झील(जोधपुर)

  1. इस झील का निर्माण जोधपुर राजपरिवार के सर प्रताप ने करवाया था । वर्तमान में झील के किनारे माचिया सफारी पार्क (मृगवन) स्थित है।

उदयसागर झील (उदयपुर)

महाराणा उदय सिंह द्वारा 1559 से 1564 ई. तक की अवधि में इसका निर्माण किया गया। आयड नदी इसमें आकर गिरती है एवं बेडच के नाम से
निकलती है।

पन्नालाल शाह का तालाब (खेतडी, झुंझुनूँ)

यह तालाब 1870 में सेठ पन्नालाल शाह ने बनवाया।
खेतडी के राजा अजीत सिंह के आमंत्रण पर पधारे स्वामी
विवेकानन्द को इसी तालाब के किनारे बने आवास में
ठहराया गया था।

गडसीसर तालाब (जैसलमेर)

इसका निर्माण सन् 1340 ई. में रावल गडसी सिंह ने जैसलमेर शहर के निकट करवाया था। यह तालाब वर्ष 1965 तक पेयजल का प्रमुख स्रोत था।
इस सरोवर का मेहराबनुमा मुख्य द्वार टीलो नामक एक वेश्या ने बनवाया । (टीलो की पोळ) इसके किनारे जैसलमेर लोक संस्कृति संग्रहालय स्थित है।

राजस्थान में जिलेवार प्रमुख झीलें, सरोवर, तालाब, रणजोहड एवं बाँध

जैसलमेर गडीसर (गडसीसर) बुझ झील, अमरसागर, मूलसागर, विजडासर, जैतसर, जसेरी, गजरूप सागर।
बाड़मेर पचपदरा झील, मेली बाँध, चन्द्र बाँध, वैणासर तालाब, जसदेर, सोनिया (रामसर), थोब रण , रेड़ाना रण।
जालोर बाँकली बाँध, जैतपुरा बाँध, बीठन बाँध, नोसरा बाँध, पादरा टैंक, बांडी- सिणदरा बाँध, भोरडा तालाब, सुन्देलाव
तालाब।
जोधपुर उम्मेद सागर, रानीसर, तख्त सागर, प्रताप सागर, पिचियाक बाँध, गुलाब सागर, बालसमंद, पदमसागर, बाई का तालाब, पालसणी तालाब।
पाली जवाई बाँध, हेमावास बाँध, सरदारसमंद, राजसागर, लाखोटिया, खारडा बाँध, बीजोवा, रूपावास, रूंदिया बाँध।
सिरोही नक्की झील, बनास बाँध, वासा बाँध, चनार बाँध, राणेलाव तालाब, अणगौर बाँध , सूकली सेलवाडा बाँध, कोदरा बाँध ।
अजमेर नारायण सागर बाँध, लसाडिया बाँध, पुष्कर, आना सागर, फॉय सागर, बीसलसर, बीर तालाब, मकरेडा, बसुंदनी,
लसाडिया।
टोंक बीसलपुर बांध,टोरडी सागर,नोटी सिगर, हथोना, नयागाँव,दूनिसागर, ढिबरु सागर,हरिपुरा, चांदसेन
नागौर डीडवाना,डेगाना, कुचामन, हरसौर बाँध, गिनाणी, बख्तसागर, शुक्र, समस तालाब, लाखोलाव तालाब।
भीलवाड़ा मेजा बाँध, खारी बाँध, नाहरसागर, जैतपुरा सागर, उम्मेद सागर, गोवटा, माँडल तालाब, सरेरी तालाब।
बीकानेर गजनेर, अनूप सागर, सूर सागर, कोलायत झील। हरसोलाव तालाब, शिवबाड़ी तालाब, सांसोलाव तालाब, मूँदहड़ों
का तालाब, देवीकुण्ड सागर, मोदियों का तालाब, अर्जुन सागर, सूर सागर
चुरू तालछापर, सेठानी का जोहडा (भगवान सागर, ब्रजकुंवरि द्वारा 1886 में निर्मित), पीथाणा जोहडा, पथराला
जोहडा।
जयपुर गलता, मान सागर (जलमहल), मावठा, कानोता बाँध, जमवा रामगढ बाँध, शीतला माता बाँध, चंदलाई तालाब,
गोलीराव तालाब, गूलर का बंधा।
दौसा माधोसागर, सेंथल सागर, कालाखोह बाँध , मोरेल बाँध।
अलवर सिलीसेढ झील, जयसमंद, तिजारा बाँध। नटनी का बारा, प्रेम रत्नाकर बाँध ।
भरतपुर अजान बाँध, बन्ध बारेठा, मोती झील
धोलपुर तालाबशाही, उधमिला सागर, पार्वती सागर, रामसागर।
करौली पााँचना बाँध, चूलीदेह, जग्गर बाँध।
सवाई माधोपुर मोरेल बाँध , ईसरदा बाँध।
कोटा जवाहर सागर, कोटा बैराज, तकली बाँध , सावनभादो
बूँदी नवलखा झील, चाकण, जैतसागर, कनकसागर झील, दुगारी झील।
बाँरा बैंथली बाँध, बिलास बाँध, गोपालपुरा बाँध
चित्तौड़गढ़ राणाप्रताप सागर, भूपाल सागर, ओराई, गंभीरी बाँध
बांसवाड़ा माही बजाज सागर, कागदी पिक-अप बाँध, अनास बाँध।
डूंगरपुर गैब सागर, सोम – कमला – अम्बा बाँध ।
उदयपुर जयसमंद, पिछोला, फतेह सागर, उदय सागर, स्वरूप सागर, गोवर्धन सागर, कुम्हारिया तालाब, बडी का तालाब,
रंगसागर।
राजसमंद राजसमंद झील, चन्द्रभागा बाँध।
सीकर पीथमपुरी, रायपुर बाँध
झालावाड़ मानसरोवर झील, काडीला, छापी, भीम सागर, गोमती सागर।
झुंझुनू पन्नालाल शाह का तालाब, बिडला तालाब, अजीत सागर।
प्रतापगढ़ जाखम बाँध, नांगलिया पिक-अप
श्री गंगानगर बुड्ढा जोहड सरोवर (गंग नहर से जलापूर्ति)।
हनुमानगढ़ तलवाडा झील (टिब्बी)।
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